RBI आज जारी करेगी Monetary Policy Statement, ब्याज में बदलाव को लेकर होगा फैसला
भारत में आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा नौकरियां देने वाले सेक्टर्स के रूप में जाना जाता है लेकिन फ्रेशर्स के लिए कुछ समय से ऑनबोर्डिंग में देरी की बड़ी समस्या पैदा कर रहा है.
इसका मतलब है कि फ्रेशर्स को कैंपस प्लेसमेंट या अन्य तरीकों से हायर तो कर लिया गया था लेकिन अभी तक उनकी ज्वाइनिंग नहीं हुई है. कुछ मामलों में तो ये शिकायत दो साल से ज्यादा देरी के लिए भी है.
ज्वाइनिंग में देरी के बारे में आई खबर
अंग्रेजी न्यूज पोर्टल टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दो सालों में भारत में कम से कम 10,000 फ्रेशर्स को नौकरी का ऑफर गया था लेकिन इन्हें अभी तक आईटी कंपनियों ने दफ्तरों में वर्कफोर्स में शामिल नहीं किया है.
इसके लिए आईटी कर्मचारी संघ नेसेंट इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट (एनआईटीईएस) के आंकड़ों का हवाला दिया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक आईटी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हरप्रीत सिंह सलूजा ने कहा कि जिन कैंडिडेट्स को टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, जेन्सर और एलटीआईमाइंडट्री सहित कंपनियों में पोजीशन ऑफर हुई थीं लेकिन अभी तक ज्वाइनिंग नहीं हुई है उन्होंने लेबर यूनियन से ऑनबोर्डिंग में देरी के बारे में शिकायत की है. टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक इन शिकायतों में टॉप लेवल और मिड लेवल दोनों आईटी कंपनियां शामिल हैं.
क्या बताया गई है देरी की वजह
रिपोर्ट में कहा गया है कि नए लोगों को शामिल करने में देरी की वजह प्रमुख रूप से नॉर्थ अमेरिका और यूरोप में कारोबारी अनिश्चितता के कारण है. यहां आर्थिक मंदी के संकेतों ने कस्टमर्स को आईटी खर्चों के बारे में अलर्ट कर दिया था और नई हायरिंग पर भी असर देखा जा रहा है.
तीन प्रमुख आईटी कंपनियों के कर्मचारियों की संख्या में है गिरावट
टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो जैसी आईटी प्रमुख कंपनियों ने हाल ही में वित्तीय वर्ष 2023-24 की चौथी तिमाही के लिए अपने जनवरी-मार्च तिमाही के नतीजों का ऐलान किया. इन सबने पूरे वित्तीय वर्ष के लिए अपने कुल कर्मचारियों की संख्या में कमी दर्ज की है. कुल मिलाकर तीन मेजर सॉफ्टवेयर सर्विस एक्सपोर्टर्स ने पूरे वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान कर्मचारियों की संख्या में 63,759 की गिरावट दर्ज की है.




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